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सेना ने दिखलाई दुनिया को भारत की ताकत -नरेन्द्र मोदी.

प्रधानमंत्री ने अचानक लद्दाख पहुँच कर दुश्मनों को किया हतप्रभ

मनोज द्विवेदी-अनूपपुर

देश की उत्तर – पूर्वी सीमा पर चीन के साथ एल ए सी पर चल रही युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ 3 जुलाई, शुक्रवार की सुबह अचानक लेह पहुंच गये।‌ यह प्रधानमंत्री द्वारा लद्दाख में तैनात भारतीय सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने की जबर्दस्त कोशिश थी। प्रधानमंत्री की इस आकस्मिक यात्रा ने ना केवल दुश्मन देशों को , बल्कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी बेचैन कर दिया।
यह दुनिया को विस्मय कर देने वाला घटनाक्रम था, जिसमें देश का प्रधानमंत्री बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक एल ए सी पर तनाव की जमीनी स्थिति देखने तथा अपनी सेना का मनोबल बढाने जा पहुंचा हो। पहले यह सूचना थी कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लद्दाख जाने वाले हैं। लेकिन फिर उनके ना जाने की खबरें मीडिया में आईं।
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के लिए शुक्रवार सुबह लेह-लद्दाख और आगे के स्थानों का दौरा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह दौरा हिंसक संघर्ष के बमुश्किल 18 दिन बाद किया है। लद्दाख के अचानक दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने चीन के साथ झड़प में घायल जवानों से लेह के अस्पताल जाकर मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया।
इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने नीमू में देश के वीर जवानों को संबोधित किया। एक तरफ जहां उन्होंने अपने भाषण से भारतीय सेना का जवानों का हौसला बढ़ाया। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी ने चीन को इशारों ही इशारों में जमकर खरी खोटी भी सुनाई।
नीमू में जवानों को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने दो टूक शब्दों मे कहा कि विस्तारवादी ताकतों का समय समाप्त हुआ। आज विश्व विकासवाद की ओर अग्रसर है। उन्होंने बिना चीन – पाकिस्तान का नाम लिये चेताया कि
हम वे लोग हैं जो बांसुरी वाले कृष्ण की पूजा करते हैं, तो हम वही लोग हैं जो सुदर्शन चक्रधारी कृष्ण को भी आदर्श मान कर चलते हैं । चीनी झडप में हमारे 20 जांबाज सैनिकों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री का यह दूसरा कडा उद्बोधन था।
चीन के साथ सीमा तनाव की जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ लेह में तैनात भारतीय सैनिकों के मनोबल को बढ़ाते हुए श्री मोदी ने कहा कि
आपका साहस उस ऊंचाई से भी ऊंचा है, जहां, आप तैनात हैं। आपका निश्चय, उस घाटी से भी सख्त है, जिसको आप रोज अपने कदमों से नापते हैं।
आपकी भुजाएं, उन चट्टानों जैसी मजबूत हैं, जो आपके इर्द-गिर्द हैं। आपकी इच्छा शक्ति आस पास के पर्वतों की तरह अटल है।
हमारे यहां कहा जाता है, वीर भोग्य वसुंधरा। यानी वीर अपने शस्त्र की ताकत से ही मातृभूमि की रक्षा करते हैं। ये धरती वीर भोग्या है। इसकी रक्षा-सुरक्षा को हमारा सामर्थ्य और संकल्प हिमालय जैसा ऊंचा है।
ये सामर्थ्य और संकल्प मैं आज आपकी आंखों पर , चेहरे पर देख सकता हूं ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी जो आपने और आपके साथियों ने वीरता दिखाई है, उसने पूरी दुनिया में ये संदेश दिया है कि भारत की ताकत क्या है ।
14 कोर की जांबाजी के किस्से हर तरफ है। दुनिया ने आपका अदम्य साहस देखा है। आपकी शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रही है। भारत के दुश्मनों ने आपकी फायर भी देखी है और आपकी फ्यूरी भी । आज हर देशवासी का सिर आपके यानी अपने देश के वीर सैनिकों के सामने आदरपूर्वक नतमस्तक होकर नमन कर रहा है। आज हर भारतीय की छाती आपकी वीरता और पराक्रम से फूली हुई है। मैं गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों को आज पुनः श्रद्धांजलि देता हूं। उनके पराक्रम ,उनके सिंहनाद से धरती अब भी ,उनका जयकारा कर रही है। हर देशवासी की सिर, आपके सामने आदरपूर्वक नमन करता है।
उन्होने वीर सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आपका ये हौसला, शौर्य और मां भारती के मान-सम्मान की रक्षा के लिए आपका समर्पण अतुलनीय है। आपकी जीवटता भी जीवन में किसी से कम नहीं है।
जिन कठिन परिस्थितियों में जिस ऊंचाई पर आप मां भारती की ढाल बनकर उसकी रक्षा, उसकी सेवा करते हैं, उसका मुकाबला पूरे विश्व में कोई नहीं कर सकता।
जब देश की रक्षा आपके हाथों में है, आपके मजबूत इरादों में है, तो सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि पूरे देश को अटूट विश्वास है और देश निश्चिंत भी है ।
वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लद्दाख यात्रा से बॊखलाए चीन के प्रवक्ता ने कहा कि जब दोनों देशों के बीच एल ए सी में तनाव कम करने के लिये वार्ता चल रही हो तो किसी तरह के उकसावे की कार्यवाही नहीं होनी चाहिए ।
देश के भीतर भी कांग्रेस मे कम बेचैनी नहीं दिखी। राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि लोग कह रहे हैं हमारी जमीन छिन गयी, प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि कोई जमीन पर कब्जा नहीं हुआ, कोई तो झूठ बोल रहा है । उसके एक अन्य नेता ने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी लद्दाख गयी थीं, तो पाकिस्तान के दो टुकडे हुए थे। अब क्या होगा ,ये देखना है। देश जब चीन – पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसे हालातों से गुजर रहा हो, कांग्रेस नेताओं की राजनैतिक बयानबाजी से दुश्मन देशों को बैठे बिठाए ताकत मिल रही है। राजनैतिक गन्दगी का असर सेना के मनोबल पर भी पडने की आशंका रक्षा विशेषज्ञ जताते रहे हैं। कांग्रेस को यह समझना होगा कि उसकी बेवजह की बयानबाजी से अपरिपक्वता का प्रदर्शन ही हो रहा है, जिससे बचा जा सकता था।
बहरहाल ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तनावपूर्ण वातावरण में एल ए सी पर तैनात सेना के बीच जाकर सराहनीय कार्य किया है। इससे ना केवल हमारी सेना का मनोबल बढा है बल्कि दुनिया को यह दो टूक संदेश भी चला गया कि यह 1967 का नहीं, 2020 का मोदी युग का मजबूत भारत है। चीन के षडयंत्र , उसके छल का माकूल जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली गयी है।

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