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धान खरीदी को लेकर भाजपा के झूठ की पोल अब खुल चुकी है

रायपुर। भाजपा द्वारा लगातार धान खरीदी में बाधा डालने की कोशिशे की जा रही है गयी है और केन्द्र सरकार द्वारा कहा गया कि सेन्ट्रल पुल में छत्तीसगढ़ के किसान के धान से बना चावल नही लिया जायेगा। इसके लिये चि_ी तक लिख दी थी मोदी सरकार ने। इस साल केन्द्र सरकार ने धान खरीदी के लिये बारदानो की उपलब्धता में बाधा डाली और अब छत्तीसगढ़ भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि जब धान का रकबा और किसानों की संख्या भी बढ़ी है तो पिछले साल जितनी धान खरीदी हुई है उतना ही इस साल क्यों खरीदा जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि इस साल 21 लाख 50 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन हो चुका है जिनसे कांग्रेस सरकार 2500 रूपये में धान खरीदने जा रही है। धान का रकबा भी बढ़ा है, किसानों की संख्या भी बढ़ी है। धान खरीदी भी लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने पहले साल 2018-19 में 15 लाख 71 हजार किसानों से 80 लाख टन से अधिक धान खरीदा और दूसरे साल 2019-20 में 19 लाख 52 हजार किसानों से 83 लाख टन से अधिक धान खरीदा गया। धान खरीदी की सुव्यवस्थित तैयारियों से भाजपा के झूठ की पोल खुल गयी है।
केंद्र सरकार ने बारदाने ही नही उपलब्ध कराये लेकिन कांग्रेस की सरकार इन तमाम समस्याओं का मुकाबला करते हुये अपने वादे को पूरा करते हुये किसानो की धान की खरीदी 1 दिसंबर से करने जा रही है। छत्तीसगढ़ में सुव्यवस्थित रूप से धान की खरीदी होगी। धान बिचौलियों और धान दलालों और धान खरीदी में गड़बडिय़ों कर किसानों को परेशान करने वालों को कोई प्रश्रय नही मिलेगा। प्रदेश के बाहर का धान नही, छत्तीसगढ़ के किसानो का उगाया हुआ धान छत्तीसगढ़ के सोसाइटियों में 2500 रूपये में खरीदा जायेगा। सरकार ने धान का दाम 2500 रू. देते हुये पहले साल 80 लाख टन से अधिक और दूसरे साल 83 लाख टन धान की खरीदी की है। भाजपा की 15 साल की सरकार में तो 12 लाख किसानों से ही औसत 50 लाख टन धान ही प्रतिवर्ष खरीदा गया।

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