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किसान आंदोलन देश से निकल कर पहुंच रहा दुनिया तक

नई दिल्ली. केंद्र सरकार के बनाए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में देश के कई लोग खुल कर सामने आ रहे हैं। अब धीरे-धीरे ये आंदोलन विदेशों तक भी पहुंचता जा रहा है। दुनियाभर में रह रहे सिख और पंजाबी लोग किसान आंदलोन से जुड़ते जा रहे हैं। इसी बीच ब्रिटेन के कुछ सांसदों मे इस बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करने की बात कही है। बता दें कि ब्रिटेन के भारतीय मूल और पंजाब से संबंध रखने वाले 36 सांसदों ने कृषि बिलों को लेकर पीएम मोदी के साथ ये मुद्दा उठाने की बात कही हैं।

उन्होंने विदेश सचिव डॉमिनिक रैब को लिखा है कि वो किसान आंदोलन को लेकर मोदी से चर्चा करें। लेबर सांसद तन्मनजीत सिंह ढेसी द्वारा समन्वित, पत्र में राब के साथ एक तत्काल बैठक की मांग की गई है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं में लेबर, कंजरवेटिव और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के पूर्व श्रम नेता जेरेमी कॉर्बिन, वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा, वैलेरी वाज़, नादिया व्हिटोम, पीटर बॉटमली, जॉन मैककॉनेल, मार्टिन डॉकर्टी-ह्यूजेस और एलिसन थेवलिस शामिल हैं।

क्या है बिटिश सांसदों की मांग

पत्र में कहा गया है, “यह ब्रिटेन में सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है, हालांकि यह अन्य भारतीय राज्यों पर भी भारी पड़ता है। कई ब्रिटिश सिखों और पंजाबियों ने अपने सांसदों के साथ इस मामले को उठाया, क्योंकि वे पंजाब में परिवार के सदस्यों और पैतृक भूमि से सीधे प्रभावित थे।” यह कहते हुए कि कई सांसदों ने हाल ही में भारतीय उच्चायोग को भारत के तीन कृषि कानूनों के प्रभाव के बारे में लिखा था, पत्र में आरोप लगाया गया है कि वे “किसानों को शोषण से बचाने और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में विफल” हैं।

ब्रिटिश सांसद हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन पर टिप्पणी भी कर रहे हैं। बर्मिंघम एजबेस्टन की लेबर सांसद और ब्रिटिश सिखों के लिए ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री पार्टी की अध्यक्ष प्रीत कौर गिल ने दिल्ली के विरोध प्रदर्शन की तस्वीरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की: “यह उन नागरिकों के साथ व्यवहार करने का कोई तरीका नहीं है जो भारत में विवादास्पद किसान विधेयक पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं”। वे कहती हैं, “दिल्ली से चौंकाने वाला दृश्य। किसान शांति से विवादास्पद बिलों का विरोध कर रहे हैं जो उनकी आजीविका को प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल उन्हें चुप कराने के लिए किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को कनाडा के हाई कमिश्नर को तलब किया गया और बताया गया कि कनाडा के पीएम कुछ कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों की ओर से भारतीय किसानों पर बयानबाजी हमारे आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप है।’ विदेश मत्रालय ने यह भी कहा कि यदि यह जारी रहा तो भारत और कनाडा के रिश्तों पर इसके गंभीर परिणाम होंगे। इन बयानों ने कनाडा में हमारे हाई कमीशन और कांसुलेट के सामने चरमपंथी गतिविधियों को बढ़ाया है, जिससे सुरक्षा की चिंता उत्पन्न हुई है।

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा था कि हम आशा करते हैं कि कनाडा की सरकार भारतीय कूटनीतिक अधिकारियों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और इसके नेता चरमपंथी एक्टिविज्म को बढ़ावा देने वाली घोषणाओं से दूर रहेंगे। भारत ने इससे पहले भी कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के बयान को गैरजरूरी बताते हुए कहा था कि घरेलू मामले में दखल ना दी जाए।

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