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पटरी पर नहीं लौटा परिवहन:लॉकडाउन के बाद 136 में से सिर्फ 76 ट्रेनें ही चालू, 500 बसें अब भी जाम, सिर्फ विमानों को ही पंख

कोरोना लॉकडाउन के बाद अब पूरा देश अनलॉक हो चुका है, लेकिन आम लोगों के परिवहन के लिए बंद हुए सारे इंतजाम अब तक पटरी पर नहीं आ सके हैं। मार्च में लॉकडाउन वाले दिन तक राजधानी के स्टेशन से 24 घंटे में 136 यात्री ट्रेनें गुजर रही थीं। अनलाॅक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक केवल 76 ही शुरू हो सकी हैं, वह भी स्पेशल के नाम पर।

अभी केवल 76 ही चल रही हैं। बसों का हाल भी बुरा है। मध्यम-लंबी दूरी समेत अब तक सिर्फ 60 प्रतिशत बसें ही शुरू हुई हैं लेकिन वह भी खाली चल रही हैं। केवल एयरपोर्ट गी गुलजार है क्योंकि लाॅकडाउन तक यहां 28 फ्लाइट चल रही थीं, जिनमें से 25 शुरू कर दी गई हैं और इसी माह पूरी फ्लाइट फिर चालू हो जाएंगी।

लगभग आधी बसें इसलिए बंद क्योंकि परमिट ही जमा कर दिया

अनलॉक-1 के साथ बसों का परिचालन धीरे-धीरे शुरू करने की छूट दी गई, लेकिन लॉकडाउन को दस माह से ज्यादा होने के बावजूद अब तक बसों का परिचालन 60 प्रतिशत ही शुरू हो सका है। आस-पास के शहरों के लिए लोग बसों में सफर करना ही पसंद नहीं कर रहे हैं। निजी वाहनों का उपयोग बढ़ गया है। रायपुर जगदलपुर में ट्रेन रुट न होने के बावजूद 100 में 60 बसें ही चल रही हैं। रायपुर से सराईपाली के लिए हर सुबह 6 बजे से हर 10 मिनट में एक बस छूटती थी।

80 गाड़ियों में अभी केवल 40 चल रही है। बलौदाबाजार के लिए हर दो मिनट में एक बस चलती थी। सुबह 6 से शाम 6 बजे तक 144 गाड़ियां चलती थीं अभी 60 बसें ही चल रही हैं। बिलासपुर के लिए हर पंद्रह मिनट में बस मिल जाती थी। अभी आधे से एक घंटे के बीच केवल 25 बसें ही चल रही हैं। दुर्ग-भिलाई-नांदगांव के लिए भी एक सौ चालीस बसों उपलब्ध थीं।

अभी 80 गाड़ियां ही चल रही हैं। राजधानी बस ओनर्स एसोसिएशन के भावेश दुबे अनुसार यात्री सफर नहीं कर रहे हैं। इसलिए बसों को बस स्टैंड या निजी पार्किंग में खड़ा कर दिया गया है। सरकार ने टैक्स में छूट दी है। आई फार्म जमा कर गाड़ियों को खड़ा कर दिया गया है। इससे टैक्स अदा नहीं करना पड़ रहा है।

विमान सेवाएं अगस्त से सुधरने लगीं और अब लगभग सामान्य

अनलॉक-1 से जून में घरेलू उड़ानें एक-एक कर विमान सेवाएं शुरू होने लगीं। मार्च में लॉकडाउन के पहले तक रायपुर के हवाई अड्डे से रोज 28 विमान उड़ान भरते थे। दस महीने में अब स्थिति सामान्य की ओर है। यहां से सबसे पहले दिल्ली की फ्लाइट चालू हुई। मुंबई में कोरोना का संक्रमण ज्यादा होने की वजह से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा।

इस बीच दिल्ली के बाद अहमदाबाद, हैदराबाद और काेलकाता के लिए उड़ानें शुरू हो चुकी थीं। मुंबई में कोरोना कंट्रोल में आने के बाद एक पहले हफ्ते में तीन दिन और बाद में विमानों की संख्या दो से चार हुई। जून 2020 में केवल 34,884 यात्रियों ने ही सफर किया। ये संख्या जून 2021 के मुकाबले में करीब 1 लाख कम थी। जून के बाद से ही एयरपोर्ट में यात्रियों की संख्या हर हफ्ते बढ़ने लगी।

अगस्त 2020 में पहली बार यात्रियों का आंकड़ा 50 हजार के पार हुआ। पूरे कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा दिसंबर में यात्रियों ने उड़ान भरी। साल के आखिरी महीने में यात्रियों की संख्या 1.50 लाख के पार हो गई। जून से अगस्त तक उड़ानों की संख्या जहां 10 से 15 थी वहीं अब उड़ानों की संख्या 25 हो गई है।

ट्रेन कम चलने से ज्यादा दिक्कत

ट्रेनों का परिचालन धीरे-धीरे शुरू तो किया जा रहा है, लेकिन अभी भी 50 फीसदी गाड़ियां ही चल रही हैं। इतना ही नहीं जो गाड़ियां चलायीं जा रही हैं उनमें अधिकतर का परिचालन सप्ताह में एक, दो या फिर तीन दिन ही हो रहा है।

ये भी यात्रियों के लिए कम कष्टदायक नहीं क्योंकि एक तो सभी ट्रेनें स्पेशल व पूजा स्पेशल के तौर पर चल रही हैं जिससे ट्रेनों का किराया लॉकडाउन से पहले की तुलना में तिगुना से भी अधिक हो गया है। दूसरी ओर, सीमित संख्या में ट्रेनों के चलने से वेटिंग भी बढ़ रही है और कंफर्म बर्थ वाले यात्रियों को ही सफर करने की अनुमति मिल रही है।

24 लोकल ट्रेनों का परिचालन भी ठप

रायपुर व दुर्ग से करीब 24 लोकल ट्रेनों का परिचालन होता था। इसमें डेमू और मेमू के साथ इंटरसिटी भी शामिल है। रायपुर से बिलासपुर, भिलाई-दुर्ग, भाटापारा, डोंगरगढ़, राजनांगांव, रायगढ़ जैसे लोकल स्टेशनों तक जाने के लिए किसी भी लोकल का परिचालन नहीं हो रहा।

राजधानी के आस-पास के इन शहरों के सफर के लिए स्पेशल ट्रेनों में टिकट बुक करवानी पड़ती है, क्योंकि अभी अनारक्षित टिकटें भी नहीं मिल रही हैं। इससे यात्रियों की जेबें कट रही हैं। रायपुर से दुर्ग जाने में जहां पहले केवल 10 रुपए लगता था, अभी यात्रियों को 75 से 90 देने पड़ रहे हैं।

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