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खेत-खलिहान में घूमते मिल रहे मगरमच्छ के बच्चे

जांजगीर-चांपा, । प्रदेश का पहला मगरमच्छ संरक्षण केंद्र अकलतरा तहसील अंतर्गत कोटमी सोनार में वन विभाग के अनुसार 300 सौ से अधिक संख्या में मगरमच्छ पार्क के अंदर में है। जिसे ग्रामीणों द्वारा गांव के अन्य तालबों से लाकर डाला गया है। कोरोना संक्रमण के चलते पार्क अभी बंद है। आपको बता दें कि बड़ी संख्या में पार्क अंदर मगरमच्छ हैं जो बरसात आते ही आकाशीय बिजली की कड़क से मगरमच्छों के अंडे फूटने लगते हैं जिसमें से मगरमच्छ के छोटे-छोटे बच्चे निकलते हैं। इसी तरह क्रोकोडायल पार्क के किनारे में मगरमच्छों द्वारा अंडा दिया गया है। जिसकी रखवाली मगरमच्छों द्वारा की जाती है। बारिश के मौषम में मगरमच्छ के छोटे छोटे बच्चे सड़क किनारे खेत खलिहान में मिलते ही रहते हैं। जिसे ग्रामीणों द्वारा जागरूकता के साथ क्रोकोडायल पार्क में छोड़ा जाता है। क्रोकोडायल पार्क किनारे तालबों में आज भी मगरमच्छ स्वतंत्र रूप से पानी अंदर विचरण कर रहे हैं। वहीं उनके छोटे -छोटे बच्चे सड़क किनारे मिल रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से गांवों के तालाबों में विचरण करने वाले मगरमच्छों को संरक्षित करने की मांग किए हैं। ताकि क्रोकोडायल में मगरमच्छों का अच्छे ढंग से संरक्षण हो। वहीं ग्रामीणों को भी दहशत से मुक्ति मिले। बारिश के दिनों में अक्सर ऐसे मामले अधिक आते हैं।

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